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UP के गांवों में 8 घंटे ही बिजली आपूर्ति, अब इस संकट की वजह सामने आई?

यूपी में बिजली संकट की बड़ी वजह सामने आई. 10 उत्पादन इकाइयां बंद होने से 5340 MW उत्पादन प्रभावित है. भारी बारिश से कोयला सप्लाई भी बाधित हुई, जिससे रात में 1500-2000 MW की कमी है.

Gaurav Dwivedi
September 15, 2026
3 min read
UP के गांवों में 8 घंटे ही बिजली आपूर्ति, अब इस संकट की वजह सामने आई?

उत्तर प्रदेश में पिछले करीब एक हफ्ते से जारी बिजली संकट के बीच अब इसकी बड़ी वजहें सामने आने लगी हैं. प्रदेश की 10 बिजली उत्पादन इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं, जिससे करीब 5340 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है. दूसरी तरफ कोयला खदानों में भारी बारिश और जलभराव से कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इन दोनों वजहों के बीच अब बिजली प्रबंधन की तैयारियों और प्लानिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं.

10 उत्पादन इकाइयां बंद, 5340 MW का असर

ऊर्जा विभाग के मुताबिक, प्रदेश की 10 उत्पादन इकाइयां फिलहाल बंद हैं. इनमें अनपरा की एक, घाटमपुर की दो, हरदुआगंज विस्तार की एक और जवाहरपुर की एक इकाई समेत रोजा, ओबरा और अन्य परियोजनाओं की इकाइयां शामिल हैं. ऊर्जा प्रबंधन के अनुसार इनमें से चार इकाइयों के 17 सितंबर से पहले और बाकी छह इकाइयों के 30 सितंबर तक चालू होने की संभावना है. इन इकाइयों के दोबारा चालू होने पर बिजली उपलब्धता में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है.

मांग कम, फिर भी बिजली की कमी क्यों?

इस बिजली संकट ने बिजली प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं. इस साल सितंबर में प्रदेश की अधिकतम मांग करीब 25 हजार मेगावाट है. पिछले साल में यह मांग करीब 30 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है. यानी इस बार पीक डिमांड करीब 5 हजार मेगावाट कम है. इसके बावजूद रात में करीब 1500 से 2000 मेगावाट बिजली की कमी सामने आ रही है. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे प्रबंधन की लापरवाही से जोड़ा है.

बारिश ने बिगाड़ा कोयले का गणित

बिजली संकट की दूसरी बड़ी वजह कोयले की आपूर्ति बताई जा रही है. ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि कोयला खदान वाले इलाकों में भारी बारिश और जलभराव के कारण कोयला भीग गया. इससे बिजली संयंत्रों को पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिल सका. इसके अलावा एनसीएल क्षेत्र की जयंत कोल माइंस में कोल साइलो गिरने से भी कोयले की सप्लाई प्रभावित हुई. नतीजा यह हुआ कि कई बिजली संयंत्रों को अपनी क्षमता के मुताबिक उत्पादन करने में दिक्कत हुई और कुछ इकाइयों को बंद करना पड़ा.

प्लांट में कोयला है तो फिर बिजली संकट क्यों?

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की फ्यूल मैनेजमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, अनपरा और एनटीपीसी सिंगरौली में करीब 10 दिन का कोयला स्टॉक उपलब्ध है. वहीं हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा, पनकी, पारीछा, घाटमपुर और खुर्जा समेत कई इकाइयों में करीब 20 दिन का कोयला मौजूद है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर कई बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक मौजूद है, तो फिर उत्पादन क्षमता पर इतना बड़ा असर क्यों पड़ा?

गांवों में ज्यादा असर, रात में कटौती

बिजली की उपलब्धता में कमी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिखाई दे रहा है. रात के समय जब मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ता है, तब अलग-अलग फीडरों पर कटौती की जा रही है. हालांकि यूपीएसएलडीसी की 14 सितंबर की रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों में औसत 18.03 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया गया है. सरकारी आंकड़ों और जमीनी शिकायतों के बीच अंतर भी अब चर्चा का विषय है.

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