राम मंदिर चंदा चोरी केस में SIT की चार्जशीट पर खड़े हुए सवाल, पूर्व IPS ने DGP से नए सिरे से की जांच की मांग
आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने यूपी के डीजीपी को पत्र लिखकर एसआईटी की चार्जशीट पर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने फिर से पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

लखनऊ: अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चंदा चोरी से जुड़े मामले में SIT की चार्जशीट पर भी अब गंभीर सवाल खड़े होना शुरू हो गए हैं। पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने DGP को पत्र भेजकर चार्जशीट पर घोर असहमति जताई है।
अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया कि जांच में नकदी गायब करने की सैकड़ों घटनाएं और पर्यवेक्षीय चूक सामने आने के बावजूद अंतिम चार्जशीट को महज 8 लोगों तक सीमित कर दिया गया है। मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने BNSS की धारा 193(9) के तहत दोबारा विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
105 चोरी की घटनाएं
पत्र में अमिताभ ठाकुर ने कहा कि मीडिया और उपलब्ध स्रोतों से सामने आए तथ्यों के अनुसार, SIT की शुरुआती जांच में जांच में 70 अलग-अलग घटनाओं और गंभीर पर्यवेक्षीय स्तर की चूकों को रेखांकित किया गया था। इसके बाद की विस्तृत SIT जांच में यह संख्या बढ़कर 105 हो गई, जिसमें अनधिकृत रूप से नकदी हटाने या छिपाने की घटनाओं का स्पष्ट उल्लेख था।
इतना ही नहीं, दान राशि की गिनती प्रक्रिया के दौरान बाहरी और अन्य व्यक्तियों की मदद लिए जाने की बात भी सामने आई थी। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में SIT ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, बैंकिंग और वित्तीय अभिलेखों के साथ-साथ व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट का भी सहारा लिया था।
जांच का दायरा बढ़ा तो आरोपियों की संख्या कैसे सिमटी?
अमिताभ ठाकुर ने कहा कि जब जांच का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा था और वित्तीय अनियमितताओं का स्तर बढ़ता जा रहा था, तब अंतिम आरोप-पत्र सिर्फ 8 लोगों के खिलाफ दाखिल करना गले नहीं उतरता। उन्होंने पूछा कि उन उच्चाधिकारियों, संस्थागत जिम्मेदारों और पर्यवेक्षकों पर क्या कार्रवाई हुई, जिनकी सीधी लापरवाही और भूमिका शुरुआती जांच रिपोर्ट में उजागर हुई थी। आरोप-पत्र को केवल 8 लोगों तक सीमित कर देना सीधे तौर पर संस्थागत व पर्यवेक्षीय जवाबदेही पर पर्दा डालने जैसा प्रतीत होता है।
अमिताभ ठाकुर ने DGP से आग्रह किया कि आस्था के इतने बड़े केंद्र से जुड़े संवेदनशील दान चोरी के मामले में कोई भी संशय बाकी नहीं रहना चाहिए। शुरुआती जांच के दौरान सामने आए सभी साक्ष्यों, पर्यवेक्षीय भूमिकाओं और चिह्नित 105 घटनाओं के सभी तथ्यों को न्याय के दायरे में लाने के लिए पुलिस को BNSS की धारा 193(9) के तहत मामले की आगे की विवेचना कराकर एक सप्लीमेंट्री व निष्पक्ष आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में SIT की चार्जशीट पर उठाए गए सवालों पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जवाब दें।
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