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KMCLU के पूर्व कुलपति प्रो. महरुख मिर्जा की बर्खास्तगी रद्द करने के फैसले पर रोक, HC की लखनऊ खंडपीठ का आदेश

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. महरुख मिर्जा की बर्खास्तगी आदेश को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी है।

Gaurav Dwivedi
September 18, 2026
2 min read
KMCLU के पूर्व कुलपति प्रो. महरुख मिर्जा की बर्खास्तगी रद्द करने के फैसले पर रोक, HC की लखनऊ खंडपीठ का आदेश

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को एकल पीठ के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (KMCLU) लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो. महरुख मिर्जा की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया था। मामले को अगली सुनवाई के लिए दो माह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीत शुक्ला की दो जजों की पीठ ने मिर्जा की रिट याचिका पर एकल पीठ द्वारा दिए गए 5 अगस्त, 2026 के फैसले के खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा दायर एक विशेष अपील पर यह आदेश पारित किया।

पांच अगस्त के फैसले को चुनौती दी गई थी

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. महरुख मिर्जा की बर्खास्तगी आदेश को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल विशेष अपील पर दिया। इसमें एकल पीठ के पांच अगस्त के फैसले को चुनौती दी गई थी।

प्रोफेसर मिर्जा ने 10 मार्च 2024 के बर्खास्तगी के आदेश 25 नवंबर 2023 की अनुशासनात्मक समिति की जांच रिपोर्ट, कार्यकारिणी परिषद के निर्णय समेत 30 सितंबर 2021 की पूरक जांच रिपोर्ट को एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी थी। एकल पीठ ने इन सबको निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय ने दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल करके एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी। खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी है।

अदालत ने नोट किया कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, हमारी राय है कि आक्षेपित निर्णय पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मामले को दो महीने बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। पीठ ने टिप्पणी की कि एकल न्यायाधीश ने न्यायिक समीक्षा की सीमाओं की अनदेखी करते हुए मिर्जा के खिलाफ आरोपों के गुण-दोष पर निष्कर्ष दर्ज किए थे।

अदालत ने नोट किया कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, हमारी राय है कि आक्षेपित निर्णय पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मामले को दो महीने बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। पीठ ने टिप्पणी की कि एकल न्यायाधीश ने न्यायिक समीक्षा की सीमाओं की अनदेखी करते हुए मिर्जा के खिलाफ आरोपों के गुण-दोष पर निष्कर्ष दर्ज किए थे।

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