UP की बड़ी खबर

यूपी में पंचायत सहायकों को मिलेंगे 9000 रुपए महीना, वापस होंगे मुकदमे, हटाए गए सहायक होंगे बहाल

पंचायत सहायकों के आंदोलन के बाद उनका वेतनमान बढ़ा दिया गया है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों पर मुकदमे हुए, वो भी वापस लिए जाएंगे।

Gaurav Dwivedi
September 16, 2026
2 min read
यूपी में पंचायत सहायकों को मिलेंगे 9000 रुपए महीना, वापस होंगे मुकदमे, हटाए गए सहायक होंगे बहाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि प्रदेश में आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे, वो सभी वापस लिए जाएंगे। बुधवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में राजभर ने कहा कि आंदोलन के दौरान हटाए गए पंचायत सहायकों की बहाली भी की जाएगी। साथ ही पंचायत सहायकों को हर महीने 9 हजार रुपए दिए जाएंगे।

ओमप्रकाश राजभर ने कहा, 'हमारे पंचायत सहायक 24 तारीख से धरने पर बैठे थे और सोमवार को मैं लखनऊ आया तो कुछ साथियों से बातचीत हुई, इन लोगों की जो मांग थी, वह जायज मांग है। मैंने आज सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है। बातचीत के बाद सभी हमारे जितने भी पंचायत सहायक हैं, सभी को 9,000 रुपया महीना देने का ऐलान मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद हुआ है।'

राजभर ने कहा कि हम लोग 8,000 रुपए पर अड़े थे। फिर हमने आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री से बात करेंगे और अब बात करके आप लोगों को कोशिश करेंगे कि और हो जाए। अब 9 हजार रुपए महीने मिलेंगे। ऐसे पंचायत सहायकों की कुल संख्या 57 हजार से अधिक है। राजभर ने कहा कि हर पंचायत सहायक के परिवार को कैशलेस सुविधा मिलेगी।
मानदेय बढ़ाने को हुआ था पंचायत सहायकों का आंदोलन

पत्रकारों के साथ बातचीत में राजभर ने कहा कि पंचायत सहायक आंदोलन के दौरान जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनके सभी मुकदमे वापस किए जाएंगे और जिनको हटाया गया है, उनकी फिर से बहाली कर दी जाएगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों पंचायत सहायकों ने अपना मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश में जगह-जगह प्रदर्शन किए।2022 में राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति की थी। इन्हें आधिकारिक तौर पर पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-सह-डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया गया था। राज्य की इस पहल का उद्देश्य सेवा वितरण का विकेंद्रीकरण करना और ग्रामीण आबादी के लिए प्रशासनिक कामकाज को सुलभ बनाना था।

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