कोडीन कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, STF ने मुख्य आरोपी भूपिंदर सिंह चौहान को लखनऊ से दबोचा
यूपी एसटीएफ ने कोडीन युक्त फेंसेडिल कफ सिरप की तस्करी के मामले में मुख्य आरोपी भूपिंदर सिंह चौहान को लखनऊ से गिरफ्तार किया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त फेंसेडिल कफ सिरप के अवैध भंडारण और उसकी अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तस्करी के मामले में यूपी एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने सिंडिकेट के मुख्य सूत्रधार भूपिंदर सिंह चौहान को लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र में राजभोग रेस्टोरेंट के पास सर्विस लेन से गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड और 2,300 रुपये नकद बरामद किए गए।एसटीएफ के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए कफ सिरप की आपूर्ति फर्जी फर्मों और कथित तौर पर बिना बिल की खरीद-बिक्री के माध्यम से की जाती थी। पूछताछ में आरोपी ने दवा कारोबार से जुड़े अपने नेटवर्क, फर्मों की भूमिका और सिरप की तस्करी से संबंधित कई जानकारियां दी हैं।
जेल में बंद भांजों से मिलने लखनऊ आया था आरोपी
यूपी एसटीएफ को इस मामले में फरार चल रहे आरोपियों की तलाश थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मुकदमे में वांछित भूपिंदर सिंह चौहान अपने उन साथियों और भांजों से मिलने लखनऊ आया है, जो जिला कारागार में बंद हैं।
एसटीएफ के अनुसार, जेल में बंद विभोर, विशाल, सचिन और बिट्टू से मिलने आने की सूचना पर टीम ने शहीद पथ की सर्विस लेन में ट्रांसफार्मर के पास घेराबंदी की। इसके बाद राजभोग रेस्टोरेंट के पास से भूपिंदर को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दाखिल कराया गया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
फार्मा कंपनी में एरिया मैनेजर से दवा कारोबार के नेटवर्क तक पहुंचा
पूछताछ में भूपिंदर सिंह चौहान ने बताया कि सिंडिकेट में शामिल विशाल सिंह और विभोर राणा उसके सगे भांजे हैं। एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी ने जनवरी 2006 में निकोलस पीरामल कंपनी में एरिया मैनेजर के तौर पर नौकरी शुरू की थी। उस समय कंपनी का मुख्यालय गाजियाबाद में था।
आरोपी के अनुसार, वर्ष 2014 में उसने अपने भांजे विशाल के नाम पर ‘VET AGENCIES’ का ड्रग लाइसेंस बनवाया और उसे एबॉट कंपनी का स्टॉकिस्ट बनवाया। इसके बाद वर्ष 2016 में विभोर राणा के नाम पर ‘GR TRADING’ का ड्रग लाइसेंस बनवाया गया। दिसंबर 2018 में इस फर्म को सुपर डिस्ट्रीब्यूटरशिप मिली।
वर्ष 2019 में भूपिंदर ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और जीआर ट्रेडिंग में मैनेजर के रूप में काम करने लगा। एसटीएफ के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान कफ सिरप के अवैध कारोबार का नेटवर्क तेजी से फैलाया गया।
बोगस फर्मों के जरिए कागजों में दिखाई जाती थी बिक्री
एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि बाद में विशाल सिंह के नाम पर ‘BN Pharmaceuticals’ फर्म को सीएफए बनाया गया। आरोप है कि इस फर्म का संचालन और बिलिंग भूपिंदर के निर्देशन में होती थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, सहारनपुर, गाजियाबाद और मेरठ समेत कई जिलों के स्टॉकिस्टों को कफ सिरप की आपूर्ति बिलिंग में दिखाई जाती थी। वहीं, गाजियाबाद में वाशु एंटरप्राइजेज, अमर ट्रेडर्स, अंकित फार्म और कृष्णा फार्मा जैसी फर्मों को बोगस बताया गया है।
एसटीएफ के अनुसार, इन फर्मों के नाम पर आवंटित कफ सिरप को गोरखपुर निवासी अमित गुप्ता उर्फ रिंकू और मेरठ निवासी आसिफ कथित तौर पर बिना बिल और जरूरी कागजात के नकद भुगतान करके खरीदते थे। जांच एजेंसी इस व्यवस्था को कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री के नेटवर्क का अहम हिस्सा मान रही है।
त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की सीमाओं तक पहुंचता था कफ सिरप
पूछताछ में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, बिना बिल खरीदे गए कफ सिरप को नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर सक्रिय तस्करों तक पहुंचाया जाता था। वहां से इसे कथित तौर पर ऊंचे दामों पर खपाया जाता था।
एसटीएफ के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में पैसों का लेन-देन हवाला चैनलों के माध्यम से किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कफ सिरप की आपूर्ति, फर्जी फर्मों के जरिए बिलिंग और नकद खरीद-बिक्री के बीच आपसी संबंध थे। एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
दिसंबर 2024 में STF और FSDA ने की थी संयुक्त कार्रवाई
इस मामले में दिसंबर 2024 में यूपी एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने संयुक्त छापेमारी और कार्रवाई की थी। इसके बाद कंपनी ने फेंसेडिल का निर्माण बंद कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद सिंडिकेट से जुड़े कई लोगों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
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