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यूपी के 16 नगर निगमों को जलभराव से बचाने का ब्लूप्रिंट तैयार, 1585 करोड़ में होगा नालों और ड्रेनेज नेटवर्क का निर्माण

यूपी के 16 नगर निगमों को जलभराव से बचाने के लिए 26 प्रॉजेक्ट्स का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रॉजेक्ट में करीब 1585 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है।

Gaurav Dwivedi
July 30, 2026
2 min read
यूपी के 16 नगर निगमों को जलभराव से बचाने का ब्लूप्रिंट तैयार, 1585 करोड़ में होगा नालों और ड्रेनेज नेटवर्क का निर्माण

लखनऊ: हर मॉनसून में जलभराव और शहरी बाढ़ की समस्या से शहरों को निजात दिलाने की तैयारी की गई है। राज्य सरकार के इंटीग्रेटेड अर्बन स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत 16 नगर निगमों में 26 प्रॉजेक्ट्स का प्रस्ताव रखा गया है।
इस साल कार्ययोजना में शामिल इन प्रॉजेक्ट्स पर करीब 1585 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मास्टर प्लान की स्टेट लेवल एपेक्स कमिटी की बैठक में इन प्रॉजेक्ट्स को रखा गया। योजना के तहत केवल नालों का ही निर्माण नहीं होगा, बल्कि शहरों के लिए एक ड्रेनेज नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा।

लखनऊ और गाजियाबाद को सबसे अधिक लाभ

प्रस्तावित कार्ययोजना में गाजियाबाद के लिए तीन प्रॉजेक्ट्स पर करीब 284.60 करोड़ रुपये रुपये खर्च का प्रस्ताव है, जबकि लखनऊ के लिए दो प्रॉजेक्ट्स पर 265.51 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राजधानी लखनऊ में सरोजनीनगर क्षेत्र के लिए 8.05 किमी लंबे ड्रेन और एनडीएमए समर्थित अर्बन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम को शामिल किया गया है।

किस नगर निगम को क्या मिला

लखनऊ-

  • बदाली खेड़ा से नदवा नाला तक RCC ड्रेन 115.51 करोड़ रुपये

  • UFRMP फेज-II के तहत शहरी बाढ़ प्रबंधन से जुड़े काम -150.00 करोड़ रुपये


गोरखपुर:सुमेर सागर बसे इलाहीबाग नाला तक RCC ड्रेन निर्माण- 82.32 करोड़ रुपये

कानपुर:

  • सराय चौराहा से केशव नगर तक RCC ड्रेन- ₹65.36 करोड

  • CTI कैनाल से शास्त्री चौक तक स्टॉर्म वॉटर ड्रेन- 42.67 करोड़ रुपये

अयोध्या: सोतिय नाला के लिए इंटीग्रेटेड फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम - 114.46 करोड़ रुपये

क्यों जरूरी हैं ये प्रॉजेक्ट्स ?

यूपी के कई नगर निगमों में ज्यादातर जगहों पर दशकों पुराने कच्चे नाले, सिल्ट से भरे ड्रेनेज चैनल और बड़े पैमाने पर नाले-नालियों और ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण के चलते बारिश का पानी निकल नहीं पाता है। इसके चलते हर बरसात के बाद भारी जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में अगर नए प्रॉजेक्ट्स समय पर पूरे हो गए तो हजारों हेक्टेअर शहरी क्षेत्र और लाखों लोगों को बाढ़ जैसी स्थिति से राहत मिल सकती है।

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